Indian Manufacturers Scaled Up Covid 19 Test Kits Production, Seven Companies Got Approval From Cdsco – कोविड-19: भारतीय कंपनियों ने बढ़ाया टेस्ट किट का उत्पादन, आयात पर लगेगी रोक


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 10 May 2020 11:42 AM IST

नमूनों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
– फोटो : PTI

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पुणे स्थित माय लैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस अप्रैल की शुरुआत में कोरोना वायरस बीमारी के परीक्षण में इस्तेमाल होने वाली 20 हजार किट का उत्पादन करती थी। अब उसने इसका उत्पादन बढ़ाकर दो लाख कर दिया है। ऐसा वह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर कर पा रही है। इससे भारत की टेस्टिंग किट की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा जिसके इस महीने के अंत तक एक लाख पहुंचने की उम्मीद है। अब भारत को विदेश से टेस्ट किट आयात करने की जरूरत नहीं होगी।
मायलैब केंद्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से टेस्ट किट का उत्पादन करने के लिए मंजूरी लेने वाली पहली स्थानीय कंपनियों में से एक थी। सीडीएससीओ ने अब छह अन्य कंपनियों को टेस्ट किट बनाने की मंजूरी दी हैं। यह सभी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मानदंड पर खरे उतरते हैं। वर्तमान में भारत रोजाना आरटी-पीसीआर के जरिए 75,000-80,000 नमूनों की जांच कर रहा है।

मई के आखिर तक भारत का लक्ष्य रोजाना एक लाख नमूनों की जांच करने की है। अब तक मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस ने 20 राज्यों की करीब 140 प्रयोगशालाओं और अस्पतालों में 650,000 टेस्ट किटों की आपूर्ति की है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदार पूनावाला ने कहा, ‘मायलैब के साथ मिलकर हमारे प्रयासों को देखना मुझे अभिभूत करता है जिससे भारत कोविड-19 का मुकाबला करने में आत्मनिर्भर बन रहा है। हमारा उत्पादन रोजाना 20 हजार से बढ़कर दो लाख हो गया है। अब हम भारत की बढ़ती मांग को पूरा कर पाएंगे।’

पिछले महीने सीरम इंडिया ने मायलैब के साथ साझेदारी की थी ताकि उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सके। कंपनी ने ब्रिटेन में नैदानिक परीक्षणों में उपयोग होने वाले टीकों का निर्माण शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास आरटी-पीसीआर का उत्पादन करने वाली छह अन्य कंपनियां है। इसके साथ ही हम इन किटों का निर्यात तक करने में सक्षम हैं।

मुंबई की मेरिल डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने टेस्ट किट का निर्माण शुरू कर दिया है और उसके पास स्टॉक में दो लाख किट हैं। दिल्ली की मेडसोर्स ओजोन बायोमेडिक्लस प्राइवेट लिमिटेड ने भी किट का निर्माण बढ़ा दिया है। राज्यों से भी किटों की मांग बढ़ रही है। खासतौर से रैपिड टेस्ट किट्स को लेकर जिससे खून में मौजूद एंटीबॉडी की जांच की जाती है।

पुणे स्थित माय लैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस अप्रैल की शुरुआत में कोरोना वायरस बीमारी के परीक्षण में इस्तेमाल होने वाली 20 हजार किट का उत्पादन करती थी। अब उसने इसका उत्पादन बढ़ाकर दो लाख कर दिया है। ऐसा वह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर कर पा रही है। इससे भारत की टेस्टिंग किट की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा जिसके इस महीने के अंत तक एक लाख पहुंचने की उम्मीद है। अब भारत को विदेश से टेस्ट किट आयात करने की जरूरत नहीं होगी।

मायलैब केंद्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से टेस्ट किट का उत्पादन करने के लिए मंजूरी लेने वाली पहली स्थानीय कंपनियों में से एक थी। सीडीएससीओ ने अब छह अन्य कंपनियों को टेस्ट किट बनाने की मंजूरी दी हैं। यह सभी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मानदंड पर खरे उतरते हैं। वर्तमान में भारत रोजाना आरटी-पीसीआर के जरिए 75,000-80,000 नमूनों की जांच कर रहा है।

मई के आखिर तक भारत का लक्ष्य रोजाना एक लाख नमूनों की जांच करने की है। अब तक मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस ने 20 राज्यों की करीब 140 प्रयोगशालाओं और अस्पतालों में 650,000 टेस्ट किटों की आपूर्ति की है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदार पूनावाला ने कहा, ‘मायलैब के साथ मिलकर हमारे प्रयासों को देखना मुझे अभिभूत करता है जिससे भारत कोविड-19 का मुकाबला करने में आत्मनिर्भर बन रहा है। हमारा उत्पादन रोजाना 20 हजार से बढ़कर दो लाख हो गया है। अब हम भारत की बढ़ती मांग को पूरा कर पाएंगे।’

पिछले महीने सीरम इंडिया ने मायलैब के साथ साझेदारी की थी ताकि उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सके। कंपनी ने ब्रिटेन में नैदानिक परीक्षणों में उपयोग होने वाले टीकों का निर्माण शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास आरटी-पीसीआर का उत्पादन करने वाली छह अन्य कंपनियां है। इसके साथ ही हम इन किटों का निर्यात तक करने में सक्षम हैं।

मुंबई की मेरिल डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने टेस्ट किट का निर्माण शुरू कर दिया है और उसके पास स्टॉक में दो लाख किट हैं। दिल्ली की मेडसोर्स ओजोन बायोमेडिक्लस प्राइवेट लिमिटेड ने भी किट का निर्माण बढ़ा दिया है। राज्यों से भी किटों की मांग बढ़ रही है। खासतौर से रैपिड टेस्ट किट्स को लेकर जिससे खून में मौजूद एंटीबॉडी की जांच की जाती है।

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